शनिवार, 11 दिसंबर 2010

दो बातें अपने आप से

ये क्यूँ जरूरी है कि कोई तुम्हे प्यार करे
ये जो आदत ऊँचा बोलने कि
और शायद बेबात भड़क जाते हो , ऐसा  लगता हो शायद किसी को
शायद किसी को यह मिजाज़ पसंद हो
लेकिन बहुत से लोग इसीलिए  हो गए हैं दूर
सड़क पार करने की जल्दबाजी , खाना खाने में ढीलापन
या जरा जरा सी बात पर उदास हो जाना
कई लोगो को  तुम्हे प्यार करने से रोक देता है

फिर बहुतो को पसंद नहीं ये तेवर
हर किसी से बेबाक बात करना
चलते हुए हर एक एक को दुआ सलाम कहना
एक बार फिर तुम्हारे खिलाफ है
तुम सब पर यकीन करते हो  तो ये जरूरी नहीं
सभी तुम्हे भी एक विश्वाश दें

हाँ शायद एक बात कुछ अच्छी लगती है
कुछ लोगो को मैं एसा  ही  जचता  हूँ
और वे सब करते हैं मुझसे  प्यार

मंगलवार, 24 नवंबर 2009

केवल भवानी से उत्पन  हुआ है गणपति
ये लीला देख कर स्तब्ध रह गए उमापति
स्त्री के  साथ किये छल का यही है फल
उमा ने भी तोडा है महादेव का मनोबल
..................

मात्र शक्ति की जरा सी  व्याख्या .......................

शनिवार, 21 नवंबर 2009

Dost

उसने मुझको तकलीफों में दोस्त कहा था क्या करता
उसकी आँखों में मुझसा एक सपना था क्या करता
यूँ तो उसके दुःख देने के सब ढंग थे याद मुझे
पर आज मिला तो मुस्काने का ढंग नया था क्या करता
फूलो वाले सारे रस्ते उसके घर को जाते थे पर
उसने मुझसा सुना पेड़ चुना था क्या करता
बचने के तो लाख बहने पूछे एक नजूमी से
पर उसके हाथो में मेरा नाम लिखा था क्या करता
प्यार किए से ऐसी गफलत क्यूँ हो जाती है
मुझसे मेरे घर का पता पूछ रहा था क्या करता


ये अजमेर के कवि श्री गोपाल गर्ग की गजल है लेकिन मेरे ख्याल से ये अधूरी है किसी भी ब्लॉगर को अगर ये कविता पूरी पता हो तो उसे पोस्ट करे और ये गजल कैसी लगी जरूर लिखे।

कान्हजी

आज कल यहाँ शहरों में सांप बहुत दिखने लगे हैं